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Wednesday, March 14, 2012
Monday, February 27, 2012
लाखों मिल जाएंगे भुजंग मेरे देश में.....
हाकिम को घूस दे के
अपना बना लो, यही
काम करवाने का है ढंग मेरे देश में
धनी लोगों, वासना के
लोलुपों को रात दिन
बेचती गरीबी अंग-अंग मेरे देश में
क्षेत्र सम्प्रदायों के
असीम हैं, अनन्त हैं व
बन्दगी के दायरे हैं तंग मेरे देश में
ढूंढना जो चाहो ढूंढ़ो,
आदमी मिले न मिले,
लाखों मिल जाएंगे भुजंग मेरे देश में
| हास्यकवि अलबेला खत्री - सूरत |
जय हिन्द !
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मनहरण
Friday, February 24, 2012
सच मानो जब तक पीर का काग़ज़ न हो..........
रात न ढले तो कभी
भोर नहीं होती बन्धु
सांझ न ढले तो कभी तम नहीं होता है
लोहू तो निकाल सकता
तेरे पाँव में से
कांच से मगर घाव कम नहीं होता है
जीने की जो चाह है तो
मौत से भी नेह कर
डरते हैं वो ही जिनमें दम नहीं होता है
सच मानो जब तक
पीर का काग़ज़ न हो
कवि की कलम का जनम नहीं होता है
![]() |
| हास्यकवि अलबेला खत्री - सूरत |
जय हिन्द !
Saturday, February 4, 2012
तो कुछ ऐसे दीवाने हैं कि बस पल भर में पाया है
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