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Monday, February 27, 2012

लाखों मिल जाएंगे भुजंग मेरे देश में.....



हाकिम को घूस दे के
अपना बना लो, यही
काम करवाने का है ढंग मेरे देश में

धनी लोगों, वासना के
लोलुपों को रात दिन
बेचती गरीबी अंग-अंग मेरे देश में

क्षेत्र सम्प्रदायों के
असीम हैं, अनन्त हैं व
बन्दगी के दायरे हैं तंग मेरे देश में

ढूंढना जो चाहो ढूंढ़ो,
आदमी मिले न मिले,
लाखों मिल जाएंगे भुजंग मेरे देश में

हास्यकवि अलबेला खत्री - सूरत

जय हिन्द !

Friday, February 24, 2012

सच मानो जब तक पीर का काग़ज़ न हो..........



रात न ढले तो कभी

भोर नहीं होती बन्धु
सांझ न ढले तो कभी तम नहीं होता है


लोहू तो निकाल सकता
तेरे पाँव में से
कांच से मगर घाव कम नहीं होता है


जीने की जो चाह है तो
मौत से भी नेह कर
डरते हैं वो ही जिनमें दम नहीं होता है


सच मानो जब तक
पीर का काग़ज़ न हो
कवि की कलम का जनम नहीं होता है

हास्यकवि अलबेला खत्री - सूरत


जय हिन्द !

Thursday, February 23, 2012

काग़ज़ों में हो रहे विकास मेरे देश में.......





इक मुख यदि है 

गुलाब जैसा महका तो

सैकड़ों के चेहरे उदास मेरे देश में


एक के शरीर पे 

रेमण्ड का सफ़ारी है तो

पांच सौ पे उधड़ा लिबास मेरे देश में


काम सारे हो रहे हैं 

कुर्सी की टांगों नीचे
 
काग़ज़ों में हो रहे विकास मेरे देश में


दूध है जो महंगा तो 

पीयो ख़ूब सस्ता है

आदमी के ख़ून का गिलास मेरे देश में

hasyakavi albela khatri -surat


जय हिन्द !

Tuesday, January 24, 2012

लीडरों के फूले- फले गाल मेरे देश में.........




पूछते हैं आप तो

बताऊंगा ज़रूर बन्धु

आज़ादी के बाद जो है हाल मेरे देश में



वोटरों के पेट पीछे

पिचके चले हैं और

लीडरों के फूले- फले गाल मेरे देश में



नीला नीला गगन भी

लगता सियाह आज

धरा हुई शोणित से लाल मेरे देश में



गद्दारों की भीड़ बढती

ही चली जा रही है

खुद्दारों का पड़ा है अकाल मेरे देश में



मराठी सुपरहिट फ़िल्म "येऊ का घरात ?"  के हिन्दी संस्करण " चिट्ठी आई है"  के गीतों की रिकॉर्डिंग  के अवसर पर निर्माता -निर्देशक व अभिनेता  दादा कोंडके  और गीतकार  अलबेला खत्री

Sunday, January 22, 2012

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती पर विनम्र शब्दांजलि


एक-एक चेहरा मायूस सा हताश सा है
एक-एक चेहरा उदास मेरे देश में

भाई आज भाई का शिकार खेले जा रहा है
बहू को जला रही है सास मेरे देश में

इतना सितम सह के भी घबराओ नहीं,
तोड़ो नहीं बन्धु यह आस मेरे देश में

टेढ़े-मेढ़े लोगों को जो सीधी राह ले आएगा,
पैदा होगा फिर से सुभाष मेरे देश में

-अलबेला खत्री  
पिथोरा कवि-सम्मेलन में मंच सञ्चालन करते हुए हास्यकवि  अलबेला खत्री




जय हिन्द !